फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम

Er Chandra Bhushan
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चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक में लगनेवाले बल की दिशा फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम (Fleming's left-hand rule) द्वारा जानी जा सकती है। इस नियम के अनुसार,

यदि हम अपने बाएँ हाथ की तीन अँगुलियों मध्यमा (middle finger),तर्जनी (forefinger) तथा अँगूठे (thumb)को परस्पर लंबवत फैलाएँ और यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा तथा मध्यमा धरा की दिशा को दर्शाते हैं,तब अँगूठा धारावाही चालक पर लगे बल की दिशा को व्यक्त करता है। 

उदहारण के लिए,यदि एक ऊर्ध्वाधर (verticle)तार में धारा ऊपर की ओर प्रवाहित हो रही हो और चुंबकीय क्षेत्र पूर्व से पश्चिम की ओर हो तो फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम का उपयोग कर हम तार पर लगते हुए बल की दिशा निकल सकते हैं। बाएँ हाथ की मध्यमा को धारा की दिशा में ,अर्थात ऊपर की ओर तथा तर्जनी को चुंबकीय क्षेत्र की दिशा,अर्थात पश्चिम की ओर करने पर हम पाते हैं कि अँगूठा दक्षिण की ओर इंगित करता है। अतः,चालक पर बल की दिशा दक्षिण की ओर होगी। 

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मैक्सवेल का दक्षिण हस्त नियम -

यदि धारावाही तार को दाएँ हाथ की मुट्ठी में इस प्रकार पकड़ा जाए कि अँगूठा धारा की दिशा की ओर संकेत करता हो , तो हाथ की अन्य अंगुलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा व्यक्त करेंगी। 



धारावाही वृताकार तार के कारन चुंबकीय क्षेत्र-रेखाएँ 

ताँबे का एक मोटा तार लेकर उसे वृत्ताकार रूप में मोड़ देते हैं। एक गत्ते के टुकड़े को क्षैतिज रूप से व्यवस्थित करते हैं और गत्ते के टुकड़े में दो छेद कर उसमें वृत्ताकार तार को इस प्रकार पार करते हैं की तार का आधा वृत्त गत्ते के ऊपर हो और आधा नीचे। तार के खुले सिरों को एक बैटरी तथा एक स्विच से जोड़ देते हैं। गत्ते के पुरे टुकड़े पर कुछ लौह-चूर्ण (iron filings)छिड़क देते हैं। 

                    अब स्विच को बंद कर तार में विधुत-धारा प्रवाहित करते हैं और गत्ते के टुकड़े को धीरे-धीरे थपथपाते हैं। लौह-चूर्ण दोनों तारो के चारों ओर संकेंद्रित वृत्तों में व्यवस्थित हो जाता हैं। इनमे वृतीय लूप में धारा के कारण चुम्बकीय क्षेत्र के पैटर्न का पता चलता है। 


जहाँ धारा गत्ते के भीतर जाती है तथा जहाँ धारा गत्ते से बाहर आती है उनके चारों ओर कुछ दूर तक चुम्बकीय क्षेत्र-रेखाओं का प्रतिरूप वृत्तीय होता है। किन्तु धारा से दूर हटने पर क्षेत्र- रेखाओं का प्रतिरूप वृतीयता से विचलित हो जाता है। धारा के केंद्र पर तथा केंद्र के निकट और उसके दोनों ओर क्षेत्र-रेखाओं का प्रतिरूप लगभग सरलरेखीय होता हैं। 

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